माँ बगलामुखी आरती
Baglamukhi Aarti
Baglamukhi Aarti - का पावन समय
नलखेड़ा सिद्ध पीठ में माँ बगलामुखी की आरती दिन में चार बार पूर्ण विधि-विधान एवं भक्तिभाव के साथ सम्पन्न की जाती है। प्रत्येक आरती का अपना विशेष महत्त्व है — भक्त अपनी सुविधा एवं श्रद्धा अनुसार किसी भी समय दर्शन हेतु पधार सकते हैं।
आरती का समय देखें
आरती एवं शृंगार का पूरा समय

मंगला आरती
Baglamukhi Aarti - दिन की पहली आरती, जब मंदिर के कपाट खुलते हैं। इस समय माँ का पंचोपचार पूजन किया जाता है। भीड़ कम होने के कारण शांत दर्शन हेतु यह सर्वोत्तम समय है।

मध्याह्न भोग आरती
Baglamukhi Aarti - दोपहर के समय माता जी को विशेष भोग अर्पित किया जाता है। भोग के दौरान मंदिर के कपाट लगभग 20–30 मिनट के लिए बंद रहते हैं।

संध्या आरती
Baglamukhi Aarti - मंदिर की सबसे भव्य आरती, जिसमें बड़ी संख्या में भक्त सम्मिलित होते हैं। इससे पहले सायं 5:30–6:00 बजे माता जी का विशेष शृंगार किया जाता है।

शेज आरती (शयन आरती)
दिन की अंतिम आरती। इसके पश्चात मंदिर के कपाट माता जी के रात्रि शयन हेतु बंद कर दिए जाते हैं।
श्रद्धालुओं के लिए कुछ पावन नियम
पीठ परंपरा एवं मंत्र जाप
नलखेड़ा एक तंत्र एवं सिद्ध पीठ है। आरती के समय श्रद्धालु मंत्र जाप करते हैं, विशेषकर माँ बगलामुखी के "ह्लीं" बीज मंत्र का उच्चारण अत्यंत शुभ माना जाता है।
पीला वस्त्र — विशेष महत्त्व
माँ बगलामुखी को पीताम्बरा भी कहा जाता है। आरती में पीले वस्त्र पहनकर सम्मिलित होना अत्यंत शुभ एवं समर्पण का प्रतीक माना जाता है।
दर्शन पूर्णतः निःशुल्क
मंदिर में दर्शन अथवा आरती में सम्मिलित होने का कोई शुल्क नहीं है — यह सभी श्रद्धालुओं के लिए सर्वथा निःशुल्क एवं सुलभ है।
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