Baglamukhi Pujari — श्री हरिओम गुरुजी
Maa Baglamukhi Temple Nalkheda — Baglamukhi Pujari श्री हरिओम गुरुजी
Maa Baglamukhi Temple Nalkheda में माँ बगलामुखी की पूजा, हवन और साधना से जुड़े श्री हरिओम गुरुजी लंबे समय से श्रद्धा एवं समर्पण के साथ अपनी सेवाएँ प्रदान कर रहे हैं। गुरु-परंपरा से प्राप्त शिक्षा एवं वैदिक विधि-विधान का शुद्ध पालन ही इस Baglamukhi Pujari की साधना का आधार है।
श्री हरिओम गुरुजी की जीवन यात्रा
श्री हरिओम गुरुजी ने मात्र 7 वर्ष की आयु से ही पूजा-पाठ एवं हवन कराना आरम्भ कर दिया था — तब से लेकर आज तक का सफर श्रद्धा, समर्पण और निरंतर साधना का प्रतीक है।
पूजा-पाठ का आरम्भ
जिस उम्र में बालक खेल-कूद में रहते हैं, उस उम्र में मंत्र, कर्मकाण्ड और यज्ञ विधि को अपना जीवन-पथ चुना।
वैदिक शिक्षा का ग्रहण
गुरु-परंपरा से प्राप्त शिक्षा — यही Baglamukhi Pujari की साधना का आधार है, जो आज भी शुद्ध विधि-विधान का पालन करते हैं।
निरंतर सेवा एवं अनुभव
इस पावन कार्य में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव प्राप्त है, जिसमें 1000+ अनुष्ठान सम्पन्न हो चुके हैं।
श्रद्धा एवं समर्पण के साथ सेवा
माँ बगलामुखी के प्रति अटूट श्रद्धा के साथ प्रतिदिन पूजा-अर्चना में संलग्न रहते हैं।
पूजन विधि
प्रत्येक अनुष्ठान पूर्ण मंत्रोच्चार, सही मुहूर्त एवं शास्त्रोक्त विधि के अनुसार सम्पन्न कराते हैं, जिससे साधक को पूजन का यथोचित फल प्राप्त हो।
वैदिक विधि-विधान
यह प्रत्येक पूजा शुद्ध वैदिक परंपरा अनुसार सम्पन्न कराते हैं।
शुद्ध मंत्रोच्चार
सम्पूर्ण मंत्रोच्चार एवं सही मुहूर्त के साथ प्रत्येक अनुष्ठान संपन्न होता है।
गुरु-परंपरा
गुरु-परंपरा से प्राप्त शिक्षा एवं शुद्ध कर्मकाण्ड ज्ञान का पालन किया जाता है।
माँ बगलामुखी के प्रति श्रद्धा
इस साधना का मूल आधार माँ बगलामुखी के प्रति अटूट श्रद्धा है।
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